
19 साल से फरार सिमी का जेहादी सोच वाला सक्रिय कार्यकर्ता स्पेेशल सेल के हत्थे चढ़ा
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 19 साल से फरार प्रतिबंधित संगठन सिमी के ऐसे सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया है जो कट्टर इस्लामिक विचाराधारा का था और सीएए कानून पर मुसलमानों को भडकाने के काम में लगा था। कश्मीर के कई खूखांर आतकवादियों से संबध बनाकर उन्हें पनाह देने वाला 58 साल का अब्दुल्ला दानिश 4 वर्षों तक सिमी की इस्लामिक पत्रिका के हिंदी संस्करण का संपादक भी रहा है।
स्पेशल सेल के डीसीपी प्रमोद सिंह कुशवाहा ने बताया कि दक्षिणी रेंज के एसीपी अतर सिंह व उनकी टीम के इंसपेक्टर शिवकुमार तथा करमवीर सिंह अपनी टीम के साथ पिछले एक साल से अब्दुल्ला दानिश (58) की गिरफ्तार के प्रयास में लगे थे। दानिश मऊ जिले का स्थायी निवासी है लेकिन इन दिनों यूपी के अलीगढ़ में छिपकर रह रहा था।
अब्दुल्ला दानिश दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में साल 2001 में दर्ज छेड़खानी और गैरकानूनी गतिविधि के एक मामले में 19 साल से अधिक समय से फरार था। ट्रायल कोर्ट ने भी साल 2002 में उसे भगौडा घोषित किया हुआ था।
एक साल पहले जब दिल्ली व देश के दूसरे हिस्सों में एनआरसी व सीएए के खिलाफ आंदोलन हो रहा था तो स्पेशल सेल का भनक लगी थी कि अब्दुल्ला दानिश एनआरसी और सीएए के खिलाफ मुस्लिम युवाओं को लामबंद कर रहा है और मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनने और कट्टरपंथी विचारधारा को बढाने के लिए धार्मिक स्थलों में जाकर प्रचास प्रसार का काम कर रहा है। एक साल तक खुफिया सूचना तंत्र स्थापित करने के बाद दानिश को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के मुताबिक सिमी पर प्रतिबंध लगने के बाद सितंबर 2001 में जब सिमी दिल्ली के जामिया नगर मुख्यालय पर पुलिस ने छापा मारा था तो सिमी के कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। कई सिमी कार्यकर्ता वहां से भाग निकले । पुलिस ने तब इस्लामिक मूवमेंट को उकसाने वाली सिमी पत्रिकाओं,भडकाऊ साहित्य, फ्लॉपी में ऑडियो/वीडियो के साथ सिमी मुख्यालय से सिमी के पोस्टर, कंप्यूटर, फोटो एल्बम बरामद किए थे।
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एसीपी अतर सिंह व इंसपेक्टर शिवकुमार |
एसीपी अतर सिंह ने बताया कि अब्दुल्ला दानिश ने वर्ष 1985 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से अरबी में एमए किया था। अलीगढ़ सिमी गतिविधियों का बडा केन्द्र होंने के कारण वीह सिमी कार्यकर्ताओं के संपर्क आया और कट्टरपंथी बन गया। सिमी में शामिल होने के बाद अब्दुल्ला दानिश ने सिमी के साप्ताहिक कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू कर दिया और संगठन में शामिल होने के लिए मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए प्रेरित करने लगा। अब्दुल्ला दानिश से प्रभावित होकर सिमी के अध्यक्ष अशरफ जाफरी ने वर्ष 1988 में उसे सिमी पत्रिका के हिंदी संस्करण का संपादक बना दिया। दानिश 4 साल तक उसका संपादक रहा।
इस दौरान उसने भारत में मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर प्रत्रिका कई तथ्यहीन भडकाऊ लेख लिखे। ज़ाकिर नगर, दिल्ली में सिमी के मुख्यालय में उसके पास एक कमरा भी मिला हुआ था जहां अब्दुल्ला दानिश ने सफदर हुसैन नागोरी, अब्दुस शुभम कुरैशी, नोमान बदर, शहनाज हुसैन, सैफ नाचिन, मो0 खालिद और अन्य कट्टरपंथी सदस्यों को सिमी में शामिल कराया था।
साल 2001 में पुलिस की छापेमारी के समय अब्दुल्ला दानिश अन्य लोगों के साथ मौके से फरार हो गया और भूमिगत हो गया। भागने के बाद अब्दुल्ला दानिश अलीगढ़ गया और उसके बाद आजमगढ़ में रहा। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। अब्दुल्ला दानिश न इस दौरान खूंखार आतंकवादी अब्दुस सुभान कुरैशी उर्फ तौकीर व अबू बशर से मुलाकात की और उन्हें सरकार के खिलाफ कुछ बडा करने के लिए उकसाया।
इन दोनों आतंकवादियों ले साल 2008 में अहमदाबाद में अपने अन्य सहयोगियों की मदद से सीरियल ब्लास्ट की वारदातों को अंजाम दिया था। अहमदाबाद ब्लास्ट के बाद अबू बशर ने अलीगढ़ में अब्दुल्ला दानिश के घर आकर पनाह ली थी। अब्दुल्ला दानिश ने अब्दुस शुभन व कुरैशी उर्फ तौकीर की मदद से केरल और कर्नाटक राज्यों में सिमी कैडर के लिए प्रशिक्षण शिविर चलाए थे।
पूछताछ में पता चला कि अब्दुल्ला दानिश के 4 भाई और 3 बहनें हैं। स्कूली शिक्षा के बाद अब्दुल्ला दानिश ने शिवली कॉलेज, आजमगढ़, यूपी से बी.ए. इस बीच उनके माता-पिता हिंदू धर्म से इस्लाम में परिवर्तित हो गए। इस्लाम धर्म की झुकाव उसने इस्लाम धर्म कबूल करके कॉलेज में इस्लामी साहित्य पढ़ना शुरू कर दिया। दानिश यूपी के आजमगढ़ में जामिया-तुल-फलाह मदरसा में भर्ती हो गया और वहां कुरान तथा उर्दू सीखी। साल 1985 में अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अरबी में एमए किया। उसी साल वह सिमी में भर्ती हो गया।
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